मैं कौन !! ये प्रश्न अपने आप में बहुत जटिल है. इसी का तो उत्तर खोजते हैं हम सब . हमको हमारा नाम , जाति , जन्म-स्थान परिभाषित नहीं कर सकते . मेरे विचार ही मेरी पहचान हैं------
जब कुछ गलत होता है मैं ऊपर वाले से सवाल जरूर करती हूं। पर फिर से , मेरे लिए कर्म ही महत्वपूर्ण है। या तो चीजों को सही करने की कोशिश की जाए या फिर अगर वे बदली नहीं जा सकतीं तो आगे बढ़ जाया जाए। मेरा मानना है कि हर व्यक्ति के लिए ईश्वर की अलग-अलग समझ हो सकती है लेकिन उसका जो एक संपूर्ण अर्थ है , मेरे लिए वही महत्वपूर्ण है। मेरे लिए जीवन की छोटी-छोटी उपलब्धि बहुत मायने रखती है और उन्हीं से मैं ढेर सारी खुशियां हासिल करती हूं। मैं जैसा कहती और करती हूं .
”मैं कौन हूं?” जो स्वयं से इस प्रश्न को नहीं पूछता है, उसके लिए ज्ञान के द्वार बंद ही रह जाते हैं. उस द्वार को खोलने की कुंजी यही है. स्वयं से पूछो कि ”मैं कौन हूं?” और जो प्रबलता से और समग्रता से पूछता है, वह स्वयं से ही उत्तर भी पा जाता है........................
मैं मनुष्य की चेतना के बहुत परे किसी उच्च शक्ति में भरोसा रखती हूं। हमें एक व्यक्ति के रूप में बस अपना काम करना है और उसे अच्छे से करना है। मुझे पता है कि मुझे ठीक इस क्षण भी कोई देख रहा है। पर आप उस वस्तु , व्यक्ति या सत्ता को क्या पुकारते हैं , यह व्यक्तिगत है। लोग पूछते हैं , क्या मैं प्रार्थना करती हूं... निश्चित रूप से। पर यह एक बातचीत की तरह है - खुद से ,जिंदगी से , उस सबसे जो मेरे चारों ओर हो रहा है।
मेरी ज़िंदगी में बहुत-कुछ गलत हुआ है पर फिर भी मुझे लोगों की अच्छाई में हमेशा भरोसा रहा। नकारात्मक सोच वालों के कथन के विपरीत यह दुनिया असल में उतनी बुरी जगह नहीं। मैं कोशिश करती हूं कि जब दूसरों के साथ कुछ गलत हो रहा हो तो मैं उससे प्रभावित न हो जाऊं पर यह इस कारण नहीं कि मैं असंवेदनशील हूं - बल्कि सच इसके विपरीत है। मैं मानती हूं कि अगर मैं भी उसके असर में आ गई तो वह मुझे कमजोर और कुछ कर सकने के नाकाबिल बना देगा। अगर आप मोटी चमड़ी के नहीं हैं तो आप उस अन्याय का मुकाबला कैसे करेंगे ? मैं मानती हूं कि किसी चीज को सुधारने का एकमात्र तरीका यही है कि आप छोटा ही सही , कुछ करें। जो हो चुका उस बारे में बैठकर सोचते रहने और निराश होने में कुछ रखा नहीं है। मेरा मानना यह है कि चीजों को बदलने की कोशिश की जाए। जब कुछ गलत होता है मैं ऊपर वाले से सवाल जरूर करती हूं। पर फिर से , मेरे लिए कर्म ही महत्वपूर्ण है। या तो चीजों को सही करने की कोशिश की जाए या फिर अगर वे बदली नहीं जा सकतीं तो आगे बढ़ जाया जाए। मेरा मानना है कि हर व्यक्ति के लिए ईश्वर की अलग-अलग समझ हो सकती है लेकिन उसका जो एक संपूर्ण अर्थ है , मेरे लिए वही महत्वपूर्ण है। मेरे लिए जीवन की छोटी-छोटी उपलब्धि बहुत मायने रखती है और उन्हीं से मैं ढेर सारी खुशियां हासिल करती हूं। मैं जैसा कहती और करती हूं .